आज केंद्र सरकार का रवैया कैसा रहा किसान आंदोलनकारियों के बीच वार्ता के दरमियान (RGTV) DELHI ROYAL GUJARAT NEWS HINDI

 

आज केंद्र सरकार की ओर से किसानों संगठनों के छठे दौर की वार्ता में केन्द्र सरकार का आज का रवैया पहले से नरम, बातचीत वाला रहा। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पीयुष गोयल और केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने किसान नेताओं को ध्यान से सुना। केन्द्र सरकार ने बाहर बातचीत का सही संदेश  जाने को लेकर पूरी संवेदनशीलता बरती। किसान नेताओं मे मनिजिंदर सिंह सिरसा को फोन करके 3.30 बजे लंगर (लंच) लेकर आने को कहा था। सिरसा सही समय पर लंगर लेकर पहुंच गए। इससे पहले भी हर दौर की बातचीत में किसान नेताओं ने लंगर का खाना-पीना लिया था। इस बार केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी रणनीति में बदलाव किया और किसानों के साथ लंगर का खाना खाया। बातचीत की मेज पर केन्द्र सरकार ने फिर साफ किया कि कृषि के तीनों कानून को रद्द करने का सवाल अनुचित है। सरकार किसानों को सुनेगी और जो भी उचित मांग होगी, उसके आधार पर कानून में संशोधन किया जाएगा। किसान नेताओं ने इस दौरान केन्द्र सरकार से बिन्दुवार अपना पक्ष रखा। किसान आंदोलन के दौरान शहीद (मत्यु) हुए किसानों के लिए न्याय और मुआवजे की भी मांग की। सरकार ने किसानों की बात मानते हुए कहा कि पराली जलाने के मामले में किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। दूसरा मसला विद्युत संशोधन विधेयक-2020 को लेकर भी सरकार ने किसानों की चिंता को मान लिया है।
तीन मांग अभी माननी बाकी है
हरमीत सिंह कादियान अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं हमारी तीन मुख्य मांगे हैं। अभी इस पर सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है। इसमें तीनों कानूनों को रद्द करना, एमएसपी पर खरीद को सुनिश्चित करना आदि है। कादियान का कहना है कि जबतक इन मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तबतक किसान आंदोलन में डटे रहेंगे कृषि मंत्री को उम्मीद, 04 जनवरी को समाप्त हो जाएगा किसानों का प्रदर्शन अगली वार्ता केंद्र सरकार और किसानों के बीच 4 जनवरी को होने वाली है अब देखना यह रहेगा कि 4 जनवरी को यह फैसला का समाधान हो पाता है या नहीं ?